Kuchh Bhooli Bisri Yaadein कुछ भूली बिसरी यादें

, Hazrat-E-Dilli
कुछ कशिश है पत्थरों में जो मुझे अपनी ओर खींचती है और अपनी कहानी मुझे सुनाती है और मुझे उसकी कहानी सुनाने पर मजबूर करती है। अगर हर एक पत्थर  जुबां

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